श्रीलंका समाचार » राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे आवास छोड़कर भागे

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श्रीलंका समाचार » राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे आवास छोड़कर भागे

Sri Lanka Economic Crisis: श्रीलंका में आर्थिक संकट काफी गहरा गया है. इस बीच महंगाई से परेशान लोग जोरदार प्रदर्शन (Sri Lanka Protest) कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन को घेर लिया है. जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) आवास छोड़कर भाग गए हैं. खबर है कि प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे के आवास के बाहर काफी हंगामा किया. कुछ प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन के अंदर घुस गए. बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया है. 

श्रीलंका की इस हालत का जिम्मेदार कौन?

श्रीलंका (Sri Lanka) आज जिस हाल में है उसमें काफी बड़ा रोल चीन (China) का भी है। चीन ने पहले श्रीलंका को सपने दिखाए, फिर अपने पैसे दिखाए और फिर जमकर भ्रष्टाचार किया। अब हालात ऐसे हैं कि चीन के कारिंदे श्रीलंका में ही बैठकर तमाशा देख रहे हैं। यदि कहा जाए कि इस वक्त श्रीलंका के सिस्टम में चीन का कब्जा हो चुका है, तो कुछ गलत नहीं होगा। श्रीलंका में जो हुआ है वह सिर्फ एक तख्तापलट नहीं है, जनता का गुस्सा नहीं है, बल्कि चीन कैसे चाल चलता है और कैसे किसी देश के अंदर बवाल शुरू करता है, उसकी एक नजीर है।

श्रीलंका को डुबोने वाले ताकतवर राजपक्षे परिवार को जानिए
अप्रैल तक श्रीलंका में सरकार में राजपक्षे परिवार के पांच लोग शामिल थे। इनमें राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे, वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे, सिंचाई मंत्री चामल राजपक्षे और खेल मंत्री नामल राजपक्षे थे। इनमें से गोटबाया को छोड़कर बाकी सब इस्तीफा दे चुके हैं।

एक समय श्रीलंका के नेशनल बजट के 70% पर इन राजपक्षे भाइयों का सीधा कंट्रोल था। राजपक्षे परिवार पर 5.31 अरब डॉलर यानी 42 हजार करोड़ रुपए अवैध तरीके से देश से बाहर ले जाने का आरोप है। इसमें महिंदा राजपक्षे के करीबी अजित निवार्ड कबराल ने अहम भूमिका निभाई थी, जो सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका के गवर्नर थे।

1. महिंदा राजपक्षे

  • 76 साल के महिंदा राजपक्षे समूह के चीफ और कुछ महीनों पहले तक प्रधानमंत्री थे। उन्होंने बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच 10 मई को इस्तीफा दे दिया था।
  • वह 2004 में प्रधानमंत्री रहने के बाद 2005-2015 तक राष्ट्रपति रहे थे। इसी दौरान भाई गोटबाया राजपक्षे को तमिलों के आंदोलन को कुचलने का आदेश दिया था।
  • महिंदा के शासनकाल में श्रीलंका और चीन की करीबी बढ़ी और उसने चीन से इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 7 अरब डॉलर का लोन लिया।
  • खास बात ये रही कि ज्यादातर प्रोजेक्ट्स छलावा साबित हुए और उनके नाम पर जमकर भ्रष्टाचार हुआ।

2. गोटबाया राजपक्षे

  • पूर्व सैन्य अधिकारी रहे गोटबाया 2019 में श्रीलंका के राष्ट्रपति बने। वह रक्षा मंत्रालय में सेक्रेटरी समेत कई अहम पद संभाल चुके हैं।
  • 2005-2015 के दौरान बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहने के दौरान डिफेंस सेक्रेटरी रहते हुए तमिलों अलगाववादियों यानी LTTE को क्रूरता से कुचल दिया था।
  • गोटबाया की टैक्स में कटौती से लेकर, खेती में केमिकल फर्टिलाइजर के इस्तेमाल पर बैन जैसी नीतियों को वर्तमान संकट की वजह माना जा रहा है।

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